आदाब

मेरे हिस्से मे और कुछ भी नही.........
कुछ कोरे सफ्फे और बेरंग रौशनाई है........

सोमवार, 4 जुलाई 2011

उसने आने को कहा था एक दिन

चढ़ते-चढ़ते आज दरिया रह गया
साहिलों पर ही उमड़ता रह गया

खुद से आगे वो निकल पाया नहीं
इसलिए पहले का पहला रह गया

था अजब तुम थे कि हँसते ही रहे
और मैं हैरान होता रह गया

ये सभी परछाईयाँ कहती हैं कि
धूप के भीतर अँधेरा रह गया

घर को मैं तब ही समझ पाया कि मैं
जब कभी घर में अकेला रह गया

बुझ गया जल कर खयाले-यार भी
हाँ मगर मन में उजाला रह गया

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया

वो गया तो ले गया आकाश भी
मन के पिंजरे में परिंदा रह गया

आँच ‘आतिश’ की न कम हो इसलिए
दुख का इक शोला था, जलता रह गया

26 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया

वो गया तो ले गया आकाश भी
मन के पिंजरे में परिंदा रह गया
bahut hi badhiyaa

संजय भास्कर ने कहा…

स्वप्निल कुमार 'आतिश'
चढ़ते-चढ़ते आज दरिया रह गया
साहिलों पर ही उमड़ता रह गया
भावमय करते शब्‍दों के साथ ... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत शब्द रचना.

vandana ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया


वो गया तो ले गया आकाश भी
मन के पिंजरे में परिंदा रह गया

behad behad behad khoobsoorat lagi ye ghazal ......ye do sher dimaag me baith gye ..maano pichle kai dinon se yahi sab chal rha ho dimaag me ...

संजय भास्कर ने कहा…

करीब 20 दिनों से अस्वस्थता के कारण ब्लॉगजगत से दूर हूँ
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत गज़ल :):)

Ravi Shankar ने कहा…

गुरु !!!!!!!!!

एकदम जबरदस्त…… एक एक हर्फ़ सीधे- सीधे कतल।

आतिश में बड़ी आँच मह्सूस हुई इसमें और इसके पहले वाली ग़ज़ल में… :)

shikha varshney ने कहा…

बुझ गया जल कर खयाले-यार भी
हाँ मगर मन में उजाला रह गया

क्या बात है :)

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

पूरी गज़ल में हासिले गज़ल शेर है
.
"खुद से आगे वो निकल पाया नहीं
इसलिए पहले का पहला रह गया!"
.
इस एक शेर को मैं तुम्हारे दीवान का बेहतरीन शेर कहता हूँ.. वैसे तो डर लगता है तुम्हारी सच्ची तारीफ़ भी करते हुए..
जाने दो देखी जाएगी.. सिर झुकाने को जी चाहता है इस शेर पर!!

अजय कुमार झा ने कहा…

सुंदर जी बहुत ही खूबसूरत रचना

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

स्वप्निल ग़ज़ल तो दिल में उतर गई यार....

कुश ने कहा…

ग़ज़ल में लय तो है ही साथ ही हर पंक्ति में गहरे अर्थ भी छुपे हुए है.. और यही बात इसे कुछ खास बनाती है..

वन्दना ने कहा…

बहुत ही शानदार दिल छूने वाली गज़ल्।

abhi ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया

अटक गया मैं...वाह स्वप्निल भाई, जवाब नहीं..

नीरज गोस्वामी ने कहा…

इस बेजोड़ ग़ज़ल के लिए, जिसके सभी अशआर दिल पर दस्तक देते हैं, मेरी दाद कबूल करें...

नीरज

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये सभी परछाईयाँ कहती हैं कि
धूप के भीतर अँधेरा रह गया ..

उफ्फ .. कमाल के शेर हैं सब ... बहुत नायाब अंदाज़ आपका हमेशा दिल में उतरता है ...

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

amrendra "amar" ने कहा…

उसने आने को कहा था एक दिन
और वो दिन है कि आता रह गया
प्रभावशाली अभिव्यक्ति

Avinash Chandra ने कहा…

मैं क्या कहूँ?
रवि भाई के शब्द वापस दोहराता हूँ :)