आदाब

मेरे हिस्से मे और कुछ भी नही.........
कुछ कोरे सफ्फे और बेरंग रौशनाई है........

शनिवार, 4 जून 2011

जवाब

तुम्हारे जवाब का मुन्तजिर
मैं बैठा रहा
पर जवाब
गणित के सवाल का तो नही था
जो आ ही जाता,
मैं बैठा रहा फिर भी
रेत घडी को बार बार
उल्टा-सीधा करते हुए
करता रहा इंतज़ार
पर तुम्हारा जवाब
पीपल के पत्ते की नोक पर
अटकी बूँद नहीं था
जो गिर ही आता हथेली पर..

मैं बैठा रहा फिर भी
ये जाने बिना
कि तुमसे प्यार करना
आइडल स्टेटस वालों को
पिंग करने जैसा था..... :D

13 टिप्पणियाँ:

Sonal Rastogi ने कहा…

ऐसा क्यों लग रहा है
दिल पे चोट खाई है तो जुबां पर ये नज़्म आई है ?
पुराने रंग में आने के लिए धन्यवाद

वन्दना ने कहा…

ओह्……………बहुत दर्द भर दिया…………क्या बात है।

richa ने कहा…

कि तुमसे प्यार करना
आइडल स्टेटस वालों को
पिंग करने जैसा था.....


या फिर इन्विज़िबल लोगों को पिंग करने जैसा... :D

रश्मि प्रभा... ने कहा…

मैं बैठा रहा फिर भी
ये जाने बिना
कि तुमसे प्यार करना
आइडल स्टेटस वालों को
पिंग करने जैसा था..... :D
dil se nikle shabd , bilkul sachche motee se

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

अनुपम उपमायें ... रचना अच्छी लगी!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

Timed out तो नहीं आया न????? सोनल जी की बात भी जवाब मांगती है.. नज्म का शीर्षक "ज़वाब" कैसे हो गया और नज्म्में भी हर जगह "ज़वाब" ही लिखा है?

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

इस कविता की सभी घटनाएँ और पात्र काल्पनिक हैं.... इसका किसी जीवित व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं ..और मारे से हो के करेगा भी क्या.. :D ..

नज़्म का उन्वान बस पहचान के लिए रख दिया.... हेहेहे..ऐवें ही

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

स्‍वप्निल भाई, आपकी आतिश भीतर तक असर करती है।

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कौमार्य के प्रमाण पत्र की ज़रूरत है?
ब्‍लॉग समीक्षा का 17वाँ एपीसोड।

मनोज कुमार ने कहा…

एक सुंदर नज़्म जो अभिधेयात्मक एवं व्यंजनात्मक शक्तियों को लिए हुए है।

'साहिल' ने कहा…

शुरू की पंक्तियाँ गंभीर लगी मगर अंत का 'ping ' ने मूड को लाइट कर दिया..........अच्छी लगी !

Udan Tashtari ने कहा…

मार्डन आर्ट की रवानी है नज़्म में...

aanch ने कहा…

:)

प्रिया ने कहा…

jaanleva hai....kasam se !:-) Jiyo Swapnil saa'b